परशुराम का अवतार वानर प्रजाति और स्त्रियों की रक्षा के लीये

PARASHURAM AVATAR WAS TO REDUCE ATROCITIES ON VAANARS AND FEMALES यह प्रश्न बार बार उठता ह..

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परशुराम का अवतार वानर प्रजाति और स्त्रियों की रक्षा के लीये

Published on 2012-02-28 00:26:00

PARASHURAM AVATAR WAS TO REDUCE ATROCITIES ON VAANARS AND FEMALES यह प्रश्न बार बार उठता है कि श्री विष्णु ने परशुराम के रूप में अवतार क्यूँ लिया, तथा उन्होंने इक्कीस बार पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन क्यूँ करा ? इससे पहले की इसपर विस्तार से चर्चा हो, यह जानना आवश्यक है कि त्रेता युग में, उस समय की भूगोलिक व् सामाजिक स्थिती क्या थी ? नई श्रिष्टी का आरम्भ सतयुग से होता है, तथा आरम्भ में सब कुछ अत्यंत धीमी गति से होता है ! आरम्भ में पृथ्वी का अधिकाँश भाग जलमग्न था, सीमित स्थान था मनुष्य को रहने के लीये ! कुर्म अवतार के साथ जब समुन्द्र में लहरों का गठन आरम्भ हो गया तो पृथ्वी का कुछ और भाग मनुष्य के रहने के लीये उपलभ्ध हुआ ! वराह अवतार उपरान्त पृथ्वी का प्रचुर भाग मनुष्य के रहने के लीये उपलभ्ध हुआ ! यह भी समझना आवश्यक है कि पिछले महायुग/कल्प से मनु इस नए महायुग में प्रवेश करते हैं , तथा अपने साथ पुराने युग के कुछ मानव को भी साथ लाते हैं, जिनमे से जो मनुष्य का मांस खाने लगे थे वे राक्षस कहलाते थे, और जो समुन्द्र में मनु के साथ निश्चित जाति वर्ग को मानते थे वे आर्य ! इन आर्यपुत्रो ने पृत्वी पर जगह जगह अपने रहने के लीये बस्ती बना ली, फिर वह धीरे धीरे राज्य कहलाने लगे ! राक्षस अलग रहने लगे तथा उनका अन्य मनुष्योंके साथ दुर्व्यवाहर और भी सक्रीय हो गया ! पढीये : कलयुग का अंत..एक नए कल्प का प्रारम्भ और मत्स्य अवतार वराह अवतार के उपरान्त पृथ्वी अनेक पशु, पक्षी से सुशोभित हो उठी थी; पृथ्वी पर विशाल वन थे और मनुष्य सीमित जगह पर ही रह रहे थे ! वन में मनुष्य की नई प्रजाति जिसे वानर कहा जाता है वह भी विकसित हो रही थी ! सत्ययुग अत्यंत ही कष्टदायक युग था मनुष्य के लीये, जिसमें अधिकाँश समय राक्षसों का राज्य रहा था, जिसमें हिर्नाकश्यप और बलि प्रमुख थे ! परन्तु परशुराम के अवतार से पूर्ण स्थिती और भी जटिल हो गई, जिसमें क्षत्रिय, अर्थात विभिन् राज्यों के सैनिक एक नई शोषण करने वाली श्रेणी बन गई ! नारी का सम्मान पूरी तरह से नष्ट हो गया था ! उसे भोग की वस्तु बना दिया गया था ! धार्मिक गुरु भी चुपचाप उसे सहे कर रहे थे ! स्वंम परशुराम के पिता ने अपने पुत्रो को अद्देश दिया था कि वह अपनी माता कि हत्या कर दे ! और भी अनेक उद्धारण हैं पुरानो में जिससे यह ज्ञात होता है कि धार्मिक गुरु स्त्रियों के साथ कैसा दुर्व्यवाहर कर रहे थे ; पढ़ें: राम से पूर्व... धर्म का उपयोग स्त्री जाती के शोषण के लिये उधर राक्षस तथा क्षत्रिय, वानर के साथ पशुओं जैसा व्यवाहर कर रहे थे ! जहाँ राक्षस वानर का मांस खाने के लीये भी प्रयोग कर रहे थे, वहाँ राज्य वानर को पशु मान कर व्यवाहर कर रहे थे ! क्षत्रिय वानर का वन में शिकार करके पकड़ते तथा फिर उनका राज्युओं में पशु की तरह से उपयोग होता ! श्रृष्टि का पालन का भार तो भगवान विष्णु पर है, इसलिए जब मनुष्य की नई प्रजाति वानर , तथा स्त्रियों पर इतना दुर्व्यवहार हो रहा था, तो प्रभु को मनुष्य अवतार में आना पड़ा ! परशुराम ने कम से कम २१ बार राज्युओं से युद्ध करा ! युद्ध में परशुराम की सेना क्षत्रियों को मारने के लीये युद्ध कर रही थी ना की मात्र परास्त करने के लीये; हाँ यह अवश्य था कि उन क्षत्रियों को जीवित छोड दिया जाता था जो यह प्रतिज्ञा ले रहे थे कि जिन स्त्रियों के साथ वह रह रहे थे, उनसे वह विवाह करेंगे ! परशुराम ने मित्र राज्यों की सहायता से शिव धनुष(प्रलय स्वरूपि, विनाशकारी...Weapon of Mass Destruction) का निर्माण करवाया , तथा इस बात को भी सर्वविदित करा कि वे उसका प्रयोग उस राज्य पर निसंकोच करेंगे, जो की वानर तथा स्त्रिओं के साथ दूरव्यवहार कर रहा है ! अंत में राज्यों ने संगठित हो कर यह निर्णय लिया कि वह वानर से किसी प्रकार का संबंध, अच्छा या बुरा नहीं रखेंगे, तथा स्त्रिओं के साथ व्यवहार धर्म अनुसार करेंगे ! चुकि यह समस्त राज्यों का निर्णय था इसलिए परशुराम को भी शिव धनुष जनकपुरी में रखवाना पड़ा ! कुछ समस्याओं का समाधान हुआ, वानर को मनुष्य का सम्मान तो नहीं दिला पाए, लेकिन दूरव्यवहार कम हो गया; उसी तरह स्र्त्रिओं के साथ शोषण तभी संभव था जब धर्म उसे उत्साहित करे ! अग्नि परीक्षा एक ऐसा ही श्रोषण था जिसे धर्म से मान्यता प्राप्त थी ! नई श्रृष्टि में अनेक प्रकार के श्रोषण होते हैं, विशेष कर जब, अलग अलग प्रजाति के मनुष्य हों , जैसे कि तब था; आर्य, राक्षस और वानर ! अगले विष्णु अवतार श्री राम को सारे दुराचार समाप्त करने के लीये और रामराज्य की स्थापना के लीये जल्दी ही अवतरित होना पड़ा ! कृप्या यह भी पढ़ें : हिंदू इतिहास ...सत्ययुग में इश्वर अवतार

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